पीडीएस में रिश्वतखोरी, छत्तीसगढ़ नंबर १ ये हेड लाइन है आज पत्रिका की, centre for media studies की रिपोर्ट में में ये बात आई है की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक लूटमार है...वाकई में १ रुपये किलो का चावल देकर प्रदेश सर्कार ने वास्तविक गरीबों को कम और फर्जी गरीबों को ज्यादा लाभ पहुँचाया है......इस प्रदेश की विडम्बना ही है कि जिनके पास ऐशो आराम की सारी सुविधाएँ हैं वो गरीबी रेखा में आते हैं....और जो वास्तव में पत्र हैं वो कार्ड बनवाने ठोकरें खा रहे हैं....सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन और मिट्टीतेल में कितना गोलमाल होता है ये तो जग जाहिर है लेकिन हमारे प्रदेश के सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मॉडल बताया जाता है विदेश से मेहमान आते हैं.....और प्रदेश सर्कार खूब वाहवाही लूटती है लेकिन हकीकत ये है कि किन भी राशन दुकानों में ये मेहमान जाती हैं वे दुकाने पहले से ही चकाचक कर दी जाती हैं न केवल दुकान बल्कि खरीददार मतलब गरीब भी चकाचक होकर राशन खरीदने पहुँचते हैं.....ये मजाक नहीं हकीकत है...कुछ माह पहले विदेशी मेहमान जब बिलासपुर पहुंचे थे तब मेरे एक मित्र ने आँखों देखी हाल बताया था...