Thursday, 15 December 2011

तानाशाही की राह पर रमन

९ दिसंबर से  केबल पर ई टीवी बंद है.......रमन सिंह कहीं न कहीं से गलत जरुर है इसीलिए मीडिया को देख लेने की धमकी देने के साथ ही चैनल का प्रसारण बंद करवा दिया और प्रदेश के अधिकांश शहरों का यही हाल है.......पत्रिका की प्रतियाँ जलाई जा रही है....पत्रिका ने सिलसिलेवार जिस तरह से प्रदेश के काले कारनामो को उजागर किया है उससे रमन सिंह के साथ ही उनके मंत्रिमंडल की नींद उड़ गयी है..... अपनी खीज निकालने के लिए ई टीवी और पत्रिका को एक एक करोड़ कि मानहानि का दावा करने के लिए रमन सिंह ने नोटिस दिया है.......जिस तरह का सलूक मीडिया के साथ किया जा रहा है उससे सरकार की तानाशाही झलकती है.......ऐसे में १९७५ के आपातकाल के लिए कांग्रेस और इंदिरा गाँधी को जी भरकर कोसने वाली भाजपा का असली चेहरा उजागर हो रहा है......और रमन सिंह अपने इस कारनामे से न केवल अपने लिए गड्ढा खोद रहे हैं बल्कि प्रदेश में भाजपा के लिए भी मुश्किलें पैदा करने वाले हैं......और उनकी पार्टी के ही लोग उनकी शिकायत दबी जुबान ही सही कर रहे हैं......साथ ही लाल,  गुलाबी पर्चों के रूप में भी पार्टी और संघ के लोगों की भावनाएं बाहर निकल रही है.......  खैर रमन सिंह ने अपने इस घटिया कारनामे से ये तो बता दिया है कि मीडिया कि अनदेखी नहीं की जा सकती और मीडिया अपनी औकात पे आ जाये तो अच्छे अच्छे धुरंधरों की हालत ख़राब कर सकता है....दरअसल हमारे प्रदेश में विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस एक जुट नहीं है नहीं तो इस सरकार के काले कारनामों की लम्बी लिस्ट बाहर निकलती साथ ही सरकार भी डरती.....हाल के दिनों में नन्द कुमार पटेल के नेतृत्व में कुछ जान जरुर आई है जिससे लगता है कि रमन सरकार को आने वाले आम चुनावों में पानी भरना न पड़ जाये........लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये उभरता है कि अगर कांग्रेस की सरकार बन जाये तो आम लोगों को क्या राहत मिल जाएगी और भ्रष्टाचार में किसी तरह का अंकुश लग पायेगा,  ये तो विश्वास के साथ कहा ही नहीं जा सकता......बावजूद इसके परिवर्तन की दरकार तो है ताकि सरकार वर्तमान की तरह निरंकुश न हो जाये....

मुगालते में सरकार

सरकार डर रही है की कहीं उसके चाहने वालों की लम्बी लिस्ट न बाहर आ जाये.....और प्रणव दा ये कह कर सिर्फ दिलासा देने की कोशिश कर रहे हैं कि विदेशों में ज्यादा काला धन जमा नहीं है लोगों द्वारा  सिर्फ खोखले दावे किये जा रहे हैं लेकिन मुद्दा ये नहीं है कि विदेशों में जमा काला धन ज्यादा है या कम......मुद्दा ये है कि हमारे देश से गैर क़ानूनी तरीकों से भ्रस्टाचार के द्वारा कमाई की गई रुपयों को किस तरह वापस लाया जाये और ऐसे काले कारनामे करने वालों के नाम न सिर्फ सार्वजनिक किये जाएँ बल्कि इन्हें उचित दंड भी दिया जाये ताकि बाकी लोगों को इससे सबक मिले.......प्रणव दा ये कह कर मजाक जरुर कर रहें हैं कि हमारे देश के किसी भी सांसद का पैसा विदेशी बैंकों में जमा नहीं है....लेकिन पूरे देशवासी न सिर्फ जानतें हैं बल्कि पूरा विश्वास है कि सबसे ज्यादा पैसा हमारे देश के नेताओं का ही जमा है.......सरकार ने ये सोच ही लिया है की किसी का भी नाम जाहिर नहीं किया जायेगा ऐसे में लोगों को शायद ही पता चले .......और प्रणव दा इस मुगालते में रह सकतें हैं कि उनका दावा सही था......