Monday, 10 October 2011

जगजीत सिंह का जाना हमारे जैसे देश के करोड़ों  ग़ज़ल प्रेमियों के लिए  गहरा आघात है........ग़ज़ल सुनने की ललक और समझ दोनों ही जगजीत सिंह को सुनते हुए हुई.....और सालों से ये सिलसिला चला आ रहा है.....जगजीत सिंह को सुनने के बाद ही गुलाम अली, अहमद हुसैन मोहम्मद हुसैन जैसे फनकारों को भी सुनने और समझने की समझ आई.....जगजीत सिंह भले ही हमारे बिच न रहें लेकिन उनके और चित्र के गए गजल हमेशा उनकी यादों को हमारे जेहन में जिन्दा रखेंगे......उनकी जुगलबंदी मुझे गुलज़ार के साथ सबसे ज्यादा पसंद रही....... निदा फ़ाज़ली के शब्दों को भी अपनी गायकी से उन्होंने लाजवाब बनाया है.....अभी उन्ही की गज़लें सुनते हुए जगजीत जी को श्रद्धांजलि दे रहा हूँ....शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आपकी आपकी कमी सी है....आज ये ग़ज़ल जगजीत सिंह जी के अचानक चले जाने से बरबस ही याद आ गई....और वास्तव में मेरी आँखों में नमी है.....जिनसे जगजीत सिंह जी को श्रद्धांजलि

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