अन्ना हजारे के अनशन और आम लोगों के साथ ही मीडिया के द्वारा मिलने वाले समर्थन से कांग्रेस बुरी तरह बौखला गई है.....और कांग्रेस के साथ ही उसके मंत्रियों और प्रवक्ता की हालत देखकर मुझे आरक्षण फिल्म के भ्रस्त और बेईमान प्राचार्य मनोज बाजपाई की याद आ रही है जो ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ प्राचार्य अमिताभ बच्चन द्वारा बच्चों को निशुल्क ही टयूसन पढ़ाने से पगलाए जैसी हालत में पहुँच जाता है. यही हाल अभी कांग्रेस की सरकार का है जो कोई भी सही निर्णय नहीं ले पा रही है. अन्ना के अनशन के नजदीक आते ही कांग्रेसी पगलाते जा रहे हैं. लेकिन एक बात और है कि भाजपाई बड़े खुश हो रहे हैं और अपने आप को दूध का धुला समझ रहे हैं जो की गलत बात है. भाजपाइयों के भी दामन में इतने दाग हैं की धोने से भी नहीं धुल रहा और पार्टी आला कमान का जो नरम रुख है वो बताता है की दाग अच्छे हैं. दिल्ली पोलिस ने जे पी पार्क में अन्ना को अनशन की इजाजत न देकर ये तो बता दिया है की वो सरकार के इशारे पर काम कर रही है और सरकार की नीयत भी इससे उजागर हो गई लेकिन सरकार बाबा रामसेव की तरह अन्ना के साथ बर्ताव करने की न सोचे भुगतना पड़ेगा.
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