आज कमल शर्माजी के नोट्स में पढ़ा उन्होंने लिखा है कि नेताओं के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढना चाहिए लेकिन मेरा ये मानना है कि नेताओं के साथ ही सरकारी कर्मचारी के बच्चों का सरकारी स्कूल में पढना अनिवार्य करना चाहिए क्योंकि हर आदमी नौकरी तो सरकारी चाहता है लेकिन अपने बच्चों को निजी स्कूल भेजता है..यंहा तक कि शिक्षाकर्मी भी अपने बच्चों की निजी स्कूल में डालते हैं...ऐसे में सरकारी स्कूल का भगवान ही मालिक है.....अधिकांश शिक्षक इमानदारी से आज कल नहीं पढ़ा रहे यही वजह है कि न तो बच्चे और न ही अभिभावक वर्त्तमान में शिकशों को उतना सम्मान देते हैं जितना पहले देते थे...जब किसी अधिकारी का बेटा सरकारी स्कूल में जायेगा तो वो अधिकारी जरुर स्कूल की शिक्षा और गुणवत्ता पर ध्यान देगा....इसी तरह ही शिक्षा व्यवस्था में बदलाव आ सकता है..इसलिए कानूनन ये बदलाव किया जाना चाहिए कि सरकारी कर्मचारी बेटा स्कूल लाइफ सरकारी स्कूल में ही पढ़े..
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