सुबह सुबह भास्कर में खबर पढ़ा की प्रदेश के १५० से अधिक भ्रष्ट कानून के फंदे से बाहर हैं वही प्रदेश में एक हजार से भी अधिक मामले लंबित हैं..सबसे बड़ी बात इनमे से ७६ केस तो सरकार दबा कर बैठी है और ई ओ डब्ल्यू और एंटी करप्सन ब्यूरो ने जाँच पूरी कर ली है लेकिन राज्य शासन से अदालत में चालान पेश करने की अनुमति नहीं मिल रही है.... जिसका क्या मतलब निकला जाये की सरकार ऐसे भ्रस्ताचारियों को बचाना चाहती है या फिर ई ओ डब्ल्यू और एंटी करप्सन ब्यूरो सिर्फ दिखावे के लिए बनाये गए.....शिकायत के बाद जिन अधिकारीयों को पकड़ा जाता है उनके खिलाफ क्या कार्यवाही हो रही है पता ही नहीं चलता...उसका कारण तो समझ में आ गया.... ई ओ डब्ल्यू और एंटी करप्सन ब्यूरो में जिस तरह से अधिकारियों की भर्ती की और सरकार ध्यान नहीं दे रही है तो सिर्फ इसलिए की ऐसे भ्रस्ताचारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही न हो....और केस सालों चलता रहे....ऐसे में प्रदेश के मुखिया रमन सिंह द्वारा अन्ना हजारे को समर्थन दिया जाना समझ से परे है.....क्योंकि उनके ही प्रदेश में भ्रस्ताचारियों का बोलबाला है जिनके खिलाफ सरकार कार्यवाही करने रूचि नहीं दिखा रही तो किस मुह से बात करती है समझ नहीं आ रहा...
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